टीबी मुक्त भारत अभियान के लिए श्रम एवं रोजगार और रक्षा के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक

नई दिल्ली, 07 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन में समन्वय मजबूत बनाने और समग्र सरकारी दृष्टिकोण द्वारा इसमें तेजी लाने के लिए मंगलवार को केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल, श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के साथ एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की। प्रगति समीक्षा बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में बदलने के लिए भारत की युवा शक्ति के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा टीबी (तपेदिक) उन्मूलन के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रत्येक मंत्रालय, संस्था और हितधारकों द्वारा उनकी क्षमताओं और पहुंच के माध्यम से योगदान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं, सामुदायिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र निदान, उपचार के प्रति प्रतिबद्धता और रोगी सहायता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की तरफ बढ़ा जा सकेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से बातचीत में मौजूदा टीबी मुक्त भारत टोली मॉडल को व्यापक बनाते हुए, अभियान में 'मेरा युवा भारत' स्वयंसेवकों और नेशनल कैडेट कोर - एनसीसी कैडेटों की भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने मंत्रालय से जांच शिविर के लिए स्वयंसेवकों के नेतृत्व में इस कार्य को विस्तारित करने, स्वयंसेवकों को प्रमुख निक्षय मित्र के रूप में प्रशिक्षित करने वाले अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम मजबूत बनाने और स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में युवाओं के नेतृत्व में जागरूकता प्रयास गहन बनाने का भी अनुरोध किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने रक्षा मंत्रालय से सामुदायिक जागरूकता रैलियों, जांच शिविरों के लिए एकत्रीकरण, घरेलू संपर्क शिक्षा और टीबी रोगियों के लिए पोषण सहायता अभियानों में एनसीसी कैडेटों और रक्षा कर्मियों से निरंतर और विस्तारित समर्थन मांगा। साथ ही एनसीसी प्रशिक्षण शिविरों, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे विशेष अवसरों, साहसिक शिविरों और ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रमों में टीबी के प्रति जागरूकता कार्यक्रम शामिल करने का अनुरोध किया।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अपने संबोधन में टीबी मुक्त भारत अभियान को और गति देने के लिए संस्थागत समन्वय और समन्वित कार्रवाई सुदृढ़ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 6 लाख स्नातक चिकित्सा छात्रों और लगभग 2 लाख स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों का प्रशिक्षित मानव संसाधन भंडार है, जिन्हें इस अभियान में देश भर के मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से सार्थक रूप से शामिल किया जा सकता है।

डॉ. मांडविया ने जिला स्तर पर समन्वय प्रभावी बनाने के लिए, प्रतिभा सेतु कार्यक्रम के उम्मीदवारों को जिला टीबी समन्वय समिति में उपयुक्त रूप से शामिल किये जाने का सुझाव दिया।

दिसंबर 2024 में आरंभ टीबी मुक्त भारत अभियान से तपेदिक के सक्रिय मामलों का पता लगाने, मरीज़ों को बेहतर स्वास्थ्य सहायता और समग्र सरकारी दृष्टिकोण द्वारा भारत के तपेदिक उन्मूलन के प्रयास में काफी तेज़ी आई है।

टीबी मुक्त भारत अभियान आरंभ होने के बाद से, देश भर में 28 करोड़ से अधिक टीबी की आशंका वाले व्यक्तियों की जांच की गई, जिसमें 39 लाख से अधिक टीबी मरीज़ों की पहचान हुई। इसमें विशेष रूप से, छाती के एक्स-रे जांच से 12.93 लाख लक्षणहीन टीबी रोगियों की पहचान की गई, जिससे उनकी बीमारी का शीघ्र निदान संभव हुआ, अन्यथा वे अनदेखे रह जाते और अपने समुदायों में बीमारी फैलाते रहते। इस अभियान से रोगी-केंद्रित सहायता तंत्र भी सशक्त हुआ है। इस पहल के तहत 57 लाख से अधिक निक्षय मित्रों ने पंजीकरण कराया है और टीबी रोगियों को 389 लाख पोषण पैकेट वितरित किए हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के विशेष देखभाल दृष्टिकोण के तहत 20 लाख से अधिक रोगियों का आकलन कर, उन्हें व्यक्तिगत सहायता प्रदान की गई, जिससे सुनिश्चित किया गया कि उपचार और देखभाल उनकी नैदानिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

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