नकली इथेनॉल प्रोजेक्ट स्कैम में व्यवसायी से 34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी
- DSS Admin
- Jun 22, 2026
इटानगर, 22 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश की नाहरलगुन पुलिस ने नाहरहलगुन पुलिस थाना में दर्ज मामले के 14 दिनों के भीतर लगभग 34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले को सुलझा लिया है और मुख्य आरोपित को असम से गिरफ्तार कर लिया है।
इसकी जानकारी आज एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, नाहरलगुन के पुलिस अधीक्षक डॉ. न्येलम नेगा ने दी। उन्होंने बाताया कि कि 5 जून को नाहरलगुन पुलिस स्टेशन में एक माला दर्ज किया गया था। गहन जांच के बाद दो सप्ताह के भीतर मामले को सुलझा लिया गया।
आरोपित की पहचान असम निवासी ऋषि राज अग्रवाल (41) के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के एक व्यवसायी राजेश अग्रवाल के साथ चार साल की अवधि में लगभग 34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
पुलिस के अनुसार, आरोपित 2022 में शिकायतकर्ता के संपर्क में आया और उसने असम में इथेनॉल फैक्ट्री स्थापित करने में मदद करने का वादा किया। उसने कथित तौर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के साथ करीबी संबंध होने का दावा किया और व्यवसायी को भरोसा दिलाया कि वह आधिकारिक मंजूरी और अनुमतियों में तेजी ला सकता है।
जांचकर्ताओं ने कहा कि आरोपित ने शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर टेक्स्ट मैसेज दिखाए और फोन पर बातचीत की व्यवस्था की, जिसमें दावा किया गया कि वे असम के मुख्यमंत्री के साथ थे।
पुलिस ने कहा कि आरोपित ने कथित तौर पर 2022 और 2026 के बीच विभिन्न बहाने बनाकर व्यवसायी से लगभग 34 करोड़ रुपये लिया। उसने कथित तौर पर दावा किया कि उसे मिलने वाले 40-50 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है और वित्तीय सहायता मांगी, साथ ही शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि एक बार उसका बकाया मिल जाने के बाद वह इथेनॉल प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित करेगा।
आरोपित पर शिकायतकर्ता को और अधिक समझाने और धोखाधड़ी को बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए जाली दस्तावेजों का उपयोग करने का भी आरोप है।
डॉ. नेगा ने कहा, हम जांच कर रहे हैं कि क्या कॉल में इस्तेमाल की गई आवाज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बनाई गई थी।
पुलिस ने 20 जून को आरोपित को गिरफ्तार किया और ऑपरेशन के दौरान एक मर्सिडीज-बेंज कार, पांच मोबाइल फोन और कई अन्य सामग्री जब्त कीं। ज़ब्त किए गए मोबाइल फ़ोनों में से एक का इस्तेमाल कथित तौर पर असम के मुख्यमंत्री की आवाज़ की नक़ल करके फ़र्ज़ी कॉल करने के लिए किया गया था; इसे आगे की जांच के लिए लैब भेजा गया है।

