श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा ने मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल को किया सम्मानित
- Sanjay Kulshrestha
- Jul 12, 2026
जम्मू। स्टेट समाचार
राजपूत शौर्य के महानायक मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल से भेंट कर श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। श्री अमर क्षत्रिय राजपूत सभा के प्रधान शमशेर सिंह चाढक़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल से मुलाकात की जिसमें ब्रिगेडियर विरेंद्र सिंह सलाथिया, रोंद्र सिंह चिब, अर्जुन सिंह वजीर शामिल थे। जम्मू-कश्मीर के सैन्य और ऐतिहासिक परिदृश्य में मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल (सेवानिवृत्त) का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में रहे जिन्होंने महाराजा हरि सिंह के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर स्टेट फोर्सेज में अपनी सेवाएँ प्रारंभ कीं और बाद में भारतीय सेना में उच्च पद तक पहुँचे। उनके अनुभव केवल सैन्य इतिहास नहीं, बल्कि डोगरा गौरव और राष्ट्रभक्ति की अमूल्य धरोहर हैं। मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल ने अनेक अवसरों पर अपने संस्मरणों में महाराजा हरि सिंह के साथ बिताए समय का उल्लेख करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी, अनुशासित, निर्भीक और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले शासक के रूप में याद किया। उन्होंने बताया कि महाराजा हरि सिंह सेना के अधिकारियों और जवानों के मनोबल को सदैव ऊँचा रखते थे तथा राज्य की सुरक्षा के प्रति अत्यंत गंभीर रहते थे। मेजर जनरल जमवाल के अनुसार, 1947 के संकटपूर्ण दौर में जब पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण किया, तब महाराजा हरि सिंह ने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। उन्होंने राज्य और जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा अंतत: भारत के साथ विलय का ऐतिहासिक निर्णय लेकर जम्मू-कश्मीर के भविष्य को सुरक्षित किया।
वे यह भी बताते रहे हैं कि महाराजा हरि सिंह केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि सैनिकों के सम्मान और अनुशासन को सर्वोपरि मानने वाले सेनानायक जैसे व्यक्तित्व थे। उनकी कार्यशैली ने जम्मू-कश्मीर स्टेट फोर्सेज को एक सक्षम और अनुशासित सैन्य बल के रूप में विकसित किया।
यही कारण था कि राज्य सेना के वीर सैनिकों और अधिकारियों ने 1947 में अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया।

