नारद जयंती : पत्रकारिता में सरलता और देशभक्ति पर हुई चर्चा

-नारद जयंती पर पत्रकारिता संगोष्ठी का आयोजन

-पत्रकारिता का उद्देश्य जनजागरण, दुष्प्रचार का जवाब दुष्प्रचार नहीं

-मीडिया में घटते विश्वास पर जताई चिंता

चंडीगढ़, 17 मई (हि.स.)। विश्व संवाद केंद्र हरियाणा तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा आयोजित संगोष्ठी में आज इस बात पर बल दिया गया कि पत्रकारिता जटिल को एक सरल बना देने की कला है। पत्रकारिता का मूल सरल, स्पष्ट और सरस होना है। नारद जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में विश्व संवाद केंद्र के सचिव राजेश कुमार ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों की अहम भूमिका रही और स्व का भाव जागृत किया। उन्होंने कहा कि उस समय पत्रकारिता का मुख्यउद्देश्य जनजागरण था। वह हरियाणा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े बंधु भगिनी संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे।

समाज परिवर्तन में मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में पत्रकारिता के चरित्र के बारे में उल्लेख किया कि उस पत्रकारों में देश भक्ति जज्बा था। उन्होंने कहा कि जो नौजवान समाज परिवर्तन करना चाहता है, वह या तो राजनीति को चुनता है या पत्रकार बनता है। उन्होंने कहा कि लिखे हुए का प्रभाव तब अधिक होता है,जब कथनी और करनी एक जैसी हो।

उन्होंने कहा कि नागरिक कर्तव्य,पर्यावरण सरंक्षण, जल संरक्षण,स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के साथ हमें कम से कम खर्च में जीवन व्यतीतकरने की आदत में बनानी होगी।

कार्यक्रम के मुख्यातिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के प्रो. डा.जेपी सिंह ने कहा कि देवर्षि नारद के संचारी मूल्यसार्वकालिक हैं, इसलिए उनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। समाज परिवर्तन के लिए उनके संचारी मूल्यों को उपयोग कीजाने की जरूरत बढ़ गई है। रणनीतिक रुप से भी देवर्षि नारद के मूल्यों पर काम करने की आवश्यकता है। उनकी संचारीकला की एक बड़ी विशेषता थी कि वे जटिल संदेशों को भी सरल और रोचक ढंग से जनता के समक्ष रखते थे।

कार्यक्रम में मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार हरेश वाशिष्ठ ने किया। इस अवसर पर हाईब्रिड वारफेयर के विशेषज्ञ कर्नल जयवंस सिंह सहित विभिन्न देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न पत्रकार संगठनों के पदाधिकारी तथा शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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