डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचार आज भी देश का कर रहें मार्गदर्शन : संचिता सिंह चौहान
- DSS Admin
- Jul 01, 2026

जौनपुर,01 जुलाई (हि.स.)। यूपी के जौनपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित 'संस्मरण पखवाड़ा' के तहत बुधवार को भाजपा की ओर से भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
मुख्य वक्ता एवं प्रदेश मंत्री संचिता सिंह चौहान ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा और अखंड भारत के संकल्प को समर्पित था। उन्होंने कहा कि एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे का उनका नारा केवल उद्घोष नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटना उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है।विशिष्ट अतिथि हरिश्चन्द्र सिंह ने कहा कि नेहरू-लियाकत समझौते से असहमति के कारण डॉ. मुखर्जी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी विचारधारा को नई दिशा दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट व्यवस्था का विरोध करते हुए देश की एकता के लिए आजीवन संघर्ष किया।
विशिष्ट अतिथि सुशील उपाध्याय ने डॉ. मुखर्जी के शैक्षिक और औद्योगिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी।जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि 23 जून 1953 को श्रीनगर में हिरासत के दौरान डॉ. मुखर्जी का निधन हो गया, लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके संघर्षों के परिणामस्वरूप कश्मीर से परमिट व्यवस्था समाप्त हुई और आज उनके विचार 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को मजबूत कर रहे हैं।कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री अजय सिंह ने किया। इस अवसर पर पीयूष गुप्ता, विनय सिंह, अमित श्रीवास्तव, अंशु कुशवाहा, पुष्पा निषाद, रीता जायसवाल, आमोद सिंह सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

