मुंबई,02 जुलाई ( हि.स.) । शराब की लत सिर्फ एक निजी दिक्कत नहीं है, बल्कि सामाजिक स्वास्थ के लिए एक गंभीर चुनौती है। नेशनल डॉक्टर्स डे के मौके पर ठाणे प्रादेशिक मनोचिकित्सालय अस्पताल में आयोजित किए गए साइंटिफिक सिंपोजियम( वैज्ञानिक दृष्टिकोण)‘शराब की लत की कला और साइंस’ में इस लत को वैज्ञानिक नजरिया संवेदनशीलता और सही इलाज से देखने का मैसेज दिया गया। इस संगोष्ठी में ठाणे स्थित प्रादेशिक मनोचिकित्सालय अस्पताल के अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक ने कहा है कि नशे की लत व्यक्ति के साथ सुधारने के लिए उसके साथ वैज्ञानिक सोच के साथ उपचार तथा हमदर्दी व्यक्त करना जरूरी है।
इंटरनेशनल एंटी-ड्रग डे ( अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस)और राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के मौके पर स्वास्थ अधीक्षक डॉ. नेताजी मुलिक के मार्ग दर्शन में आयोजित किए गए संगोष्ठी के पहले सत्र में, डॉ. भूषण पाटिल ने शराब की लत के बायोलॉजिकल, मनोवैज्ञानिक, सोशल और फैमिली पहलुओं के बारे में बताया। नशे की लत का असर इंसान के साथ-साथ पूरे परिवार पर भी पड़ता है। इसलिए, उन्होंने समय पर जांच , जन जागृति और मिलकर कोशिश करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
इसके बाद, प्रथम वर्ग मनो चिकित्सक डॉ. अमोल भुसारे ने शराब की लत के मॉडर्न इलाज के तरीकों, दवा, काउंसलिंग, पुनर्वसन, दोबारा लत लगने से रोकने के तरीकों और परिवार के सपोर्ट की भूमिका के बारे में मार्ग दर्शन दिया। उन्होंने कहा कि अगर नशे की लत वाले व्यक्ति को दोष देने के बजाय हमदर्दी, सम्मान और लगातार मनोवैज्ञानिक सहारा दिया जाए तो नशे की लत से उबरना ज़्यादा असरदार होता है। इस सेमिनार में अस्पताल के अलग-अलग विभागों के चिकित्सक अधिकारी , नर्सिंग स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों ने अपने-आप हिस्सा लिया।
ठाणे के प्रादेशिक मनोचिकित्सालय अस्पताल के अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक का कहना है कि -नशे की लत छुड़ाना सिर्फ़ डॉक्टरों की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज का एक मिलकर किया जाने वाला मूवमेंट है। हर हेल्थ वर्कर थेरेपिस्ट के साथ मिलकर पब्लिक अवेयरनेस का एंबेसडर है। हम मेंटल हेल्थ और नशे की लत से उबरने का मैसेज हर परिवार तक पहुँचाने के लिए प्र
तिबद्ध हैं।
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