नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 10 साल की सजा, डीएनए जांच से हुई पुष्टि,
- DSS Admin
- Jun 23, 2026
पश्चिम बर्दवान, 23 जून (हि.स.)।
नाबालिग के साथ दुष्कर्म और शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने के मामले में आसनसोल सदर स्पेशल कोर्ट ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। स्पेशल कोर्ट की न्यायाधीश सुवर्णा बंदोपाध्याय ने मंगलवार को जामुडिया थाना क्षेत्र निवासी शिवम बाउरी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 6 महीने की सजा काटनी होगी।
मामले की जानकारी देते हुए अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता तापस वकील ने बताया कि 29 सितंबर 2021 को नाबालिग की मां ने जामुडिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी 16 वर्षीय बेटी के साथ शिवम बाउरी ने शादी का आश्वासन देकर शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत दर्ज होने के समय पीड़िता गर्भवती थी। बाद में जब परिवार को घटना की जानकारी हुई और शादी की बात सामने आई, तो आरोपित ने विवाह से इनकार कर दिया।
मामले के अनुसार 27 मार्च 2021 को नाबालिग ने एक पुत्र को जन्म दिया था। इसके बाद जामुडिया थाना में कांड संख्या 398/21 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 417 तथा पोक्सो एक्ट की धारा 4 एवं 6 के तहत मामला शुरू किया गया।
जांच के दौरान 9 अक्टूबर 2021 को पुलिस ने शिवम बाउरी, लखीराखी राम बाउरी, माया बाउरी, शंकर बाउरी
समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया। सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 10 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले को मजबूत करने के लिए अदालत में मां, बच्चे और आरोपित का डीएनए टेस्ट कराने का आवेदन किया गया था। अदालत की अनुमति के बाद आसनसोल जिला अस्पताल में रक्त नमूने लिए गए और जांच के लिए कोलकाता स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे गए। जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि आरोपी शिवम बाउरी ही बच्चे का जैविक पिता है।
साक्ष्य, गवाहों की गवाही और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपित को दोषी करार देते हुए पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत सजा सुनाई गयी। अन्य तीन को जमानत मिला और केस खलास कर दिया गया।
इसके अलावा अदालत ने पीड़िता को विक्टिम कंपेनसेशन स्कीम के नियम 9 के तहत 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का भी आदेश दिया।
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