डीएफओ व टीम पर ग्रामीणों की भीड़ ने किया हमला

धमतरी, 18 मई (हि.स.)। सालों से पेड़ काटने वाले अतिक्रमणकारियों की गिरफ्तारी के लिए गांव पहुंचे उदंती सीतानदी अभ्यारण के उपनिदेशक-डीएफओ व टीम पर आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ ने हमला कर दिया। डीएफओ बमुश्किल भीड़ से निकलकर अपनी जान बचाई। घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस मौजूद नहीं थी। खबर के बाद पुलिस पहुंची और वन विभाग की टीम ने छह से अधिक ग्रामीणों की गिरफ्तारी कर कार्रवाई की।

नगरी ब्लाक अंतर्गत सिहावा थाना क्षेत्र के ग्राम जैतपुरी में सोमवार दोपहर वन विभाग के डीएफओ व उदंती सीतानदी अभ्यारण के उपनिदेशक वरुण जैन टीम के कर्मचारियों के साथ पहुंचे, तो ग्रामीणों की भीड़ वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को देखकर एकत्र हो गए। अतिक्रमणकारियों की गिरफ्तारी की बात सुनने के बाद भीड़ आक्रोशित होकर डीएफओ वरूण जैन व टीम के कर्मचारियों पर हमला कर दिया। यह गांव संवेदनशील होने के कारण माहौल खराब हो गया। वन विभाग के कर्मचारियों की मदद से डीएफओ किसी तरह भीड़ से निकलकर अपनी जान बचाई। इस बीच कर्मचारियों पर भी ग्रामीणों ने हमला कर दिया। इस घटना के बाद तत्काल डीएफओ ने सिहावा पुलिस में घटना की जानकारी दी तो मौके पर पुलिस अधिकारी व जवानों की टीम गांव पहुंचे, तब जाकर माहौल शांत हुआ। पुलिस के समय पर नहीं पहुंचने से बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता था।

डीएफओ वरुण जैन ने बताया कि पुलिस के पहुंचने के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विभाग आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमणकारियों के अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय ने पहले ही खारिज कर दी है। सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किया जा चुका था, इसके बाद भी यह घटना हुई है, जो उचित नहीं है।मालूम हो कि वन विभाग के सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे से बड़ा खुलासा हुआ था कि सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर वन्यप्राणी क्षेत्र और महानदी के कैचमेंट इलाके में पिछले 15 वर्षों में करीब एक लाख पेड़ों की अवैध कटाई कर 106 हेक्टेयर (265 एकड़) जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इस मामले में ग्राम जैतपुरी के 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी।

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2011 में 45 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण पाया गया था, जो अगले 10 वर्षों में बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया। जबकि सभी अतिक्रमणकारियों के पास राजस्व क्षेत्र में अपनी जमीन भी मौजूद है, इसके बावजूद उन्होंने वन भूमि पर कब्जा किया। जांच में सामने आया था कि पहले इस वन क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 पेड़ थे, जो अब घटकर 25-50 पेड़ प्रति हेक्टेयर रह गए हैं। इससे स्पष्ट है कि अतिक्रमणकारियों ने खेती के लिए बड़े पैमाने पर जंगल साफ किया। इस अपराध के लिए वन विभाग ने सभी 166 आरोपितों के खिलाफ जुर्म दर्ज किए हैं और बेदखली नोटिस भी जारी किया था।

   

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