किसान सहजन की खेती से कम लागत में बढ़ाएं आय : डॉ. सुशील सिंह
- DSS Admin
- May 21, 2026
झांसी, 21 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसानों को सहजन (मोरिंगा) की खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि यह फसल कम लागत में अधिक लाभ देने वाला बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। पोषण और औषधीय गुणों के कारण सहजन की मांग तेजी से बढ़ रही है।
डॉ. सुशील सिंह ने बताया कि सहजन की पत्तियों और फलियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। इस कारण इसे “सुपर फूड” का दर्जा मिला है। इसका उपयोग सब्जी, औषधि और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जा रहा है। डॉ. सिंह ने बताया कि सहजन की प्रमुख प्रजातियों में पीकेएम-1, पीकेएम-2, थार हर्षा और थार तेजान शामिल हैं। पीकेएम-1 और पीकेएम-2 किस्मों से वर्ष में दो बार फलियां प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ खेती के लिए 200 से 300 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। मई के अंतिम सप्ताह से 15 जून तक नर्सरी तैयार करना उपयुक्त माना जाता है। लगभग 35 से 40 दिन बाद पौधों की रोपाई की जाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की मेड़ों पर भी सहजन के पौधे लगाएं। इससे परिवार को पौष्टिक सब्जी मिलने के साथ अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी।उल्लेखनीय है कि सहजन की सब्जी बनने के साथ ही मार्केट में इसका पावडर भी उपलब्ध है। मांग बढ़ने की वजह से अच्छी किसानों को इसकी अच्छी कीमत मिल रही है।
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