संवेदनाएं शून्य...करोड़ों के चढ़ावे के बावजूद श्रद्धालुओं के गर्मी में जल रहे पैर, मंदिर से बाहर निकलते ही लगानी पड़ रही दौड़

चित्तौड़गढ़, 18 मई (हि.स.)। वैश्विक आस्था के केंद्र श्री सांवलियाजी मंदिर में हर माह करोड़ों रुपए चढ़ावा आ रहा है लेकिन श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं शून्य सी नजर आती है। मैनेजमेंट सही नहीं होने के कारण श्रद्धालु परेशान दिखाई देते है। वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर जारी है। जमीन तप कर आग उगल रही है, जिस पर नंगे पैर 10 कदम चलना भी संभव नहीं हैं वहां श्रद्धालुओं को थर्ड डिग्री का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर से बाहर निकलते ही सभी को दौड़ लगानी पड़ रही है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का तो बहुत ही बुरा हाल है। यह सब कुछ मंदिर के निकास गेट पर ही हो रहा है। लेकिन ना तो मंदिर प्रशासन और ना ही मंदिर बोर्ड गंभीरता से विचार कर रहा है, जिसका सीधा खामियाजा श्रद्धालुओं को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि हर माह करोड़ों रुपए का चढ़ावा आने के बाद भी श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही है। श्रद्धालु मंदिर। से निकल कर झुलसती धूप में नंगे पांव दौड़ लगा रहे हैं, जिससे कि भीषण गर्मी के थर्ड डिग्री से बच सके।

जिले के मंडफिया कस्बे में स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए कई व्यवस्थाएं की हुई हैं। लेकिन यह व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही है। यहां श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी से झूझना पड़ रहा है। मंदिर के निकास द्वार से बाहर निकलते ही तपती गर्मी में नंगे पैर चलना पड़ रहा है। पैर को जलने से बचाने के लिए दौड़ तक लगानी पड़ रही हैं यशोदा विहार के सामने स्थित निकास द्वार पर तो कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है। यहां मंदिर की सीढ़ियों से ही धूप शुरू हो रही है। सीढ़ियों से आगे भी डामर की सड़क है, जिस पर नंगे पैर चलना पड़ रहा है। जिले में अभी 44 डिग्री के आस-पास तापमान बना हुआ है और दिन उगने के साथ ही धरती तपने लग जाती है। ऐसे में मंदिर के निकास द्वार पर अव्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं के पैर जल रहे हैं। मंदिर प्रशासन भले ही लाख दावे करें लेकिन वास्तविकता यह है कि पुख्ता मॉनिटरिंग के अभाव में श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपए का चढ़ावा प्रति माह आने के बाद भी श्रद्धालु परेशान हो रहे हैं।

मंदिर प्रशासन की और से गर्मी के मौसम में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं भी की हैं। कई स्थानों पर टेंट लगा कर छाया की है और जगह-जगह पानी के कैम्पर रखवाने के अलावा आरओ भी लगवाएं हैं। लेकिन यशोदा विहार धर्मशाला के सामने स्थित मंदिर के निकास द्वार के पास कुछ हिस्सा और कुरेठा नाका के पास के हिस्से में ना तो छाया है और ना ही मैट बिछाई गई है, जिसमें श्रद्धालुओं के पैर जल रहे हैं।

बच्चों को गोद में उठा लगानी पड़ रही दौड़ यहां मंदिर के निकास द्वार की सीढ़ियों पर आते ही पैर जलने लगते हैं। सड़क पर आते ही तो तपन और बढ़ जाती हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को दौड़ लगाते हुवे देखा जा सकता है। जलते हुई पैरों को बचाने के लिए श्रद्धालुओं को दौड़ ही लगानी पड़ती हैं। यहां तक श्रद्धालु अपने बच्चों को गोद में उठा कर दौड़ लगाते देखे जा सकते हैं। वहीं बुजुर्ग तो दौड़ भी नहीं लगा सकते। उन्हें तो मजबूरी में जलते हुवे पैरों से पैदल ही चलना पड़ता है। यहां जलते पैरों से श्रद्धालु चिल्लाते हुवे निकलते हैं। छोटे बच्चों को दौड़ते हुवे देखा जा सकता है। बच्चे जोर से चिल्लाते हुवे निकलते हैं। श्रद्धालुओं के चिल्लाने की करुण आवाज वहां खड़े रह कर पांच मिनिट भी नहीं सुन सकते।

इधर जानकारी में सामने आया कि पूर्व के वर्षों में यशोदा विहार धर्मशाला के सामने स्थित गेट से ही निकासी होती आ रही थी। इसका कारण यह भी है कि मार्केट पूरा इसी तरफ है। वहीं पूर्ववर्ती भाजपा बोर्ड में स्थानीय राजनीतिक कारणों को साधने के लिए व्यवस्थाओं का बहाना कर गेट को बंद कर दिया। केवल भीड़ अधिक होने पर इस गेट को खोलने लगे हैं। अभी भी केवल दो दिन के लिए गेट खोला गया है, जो अव्यवस्थाएं उजागर होने के बाद बंद कर दिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि व्यवस्थाओं के नाम पर गेट बंद करना कितना उचित है।

श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल केे प्रशासनिक अधिकारी एवं नायब तहसीलदार शिव शंकर पारीक के अनुसार अमावस्या पर अचानक भीड़ बढ़ने के कारण यशोदा विहार के सामने वाला गेट खोला था। अब पुनः सिंहद्वार वाले रास्ते से ही श्रद्धालुओं की निकासी होगी। अगली अमावस्या पर व्यवस्थाओं में और सुधार करेंगे। इस अमावस्या भी हमने श्रद्धालुओं के लिए टैंट लगवाए, सड़क पर व्हाइट पेंट करवाया, जिससे कि श्रद्धालुओं के पैर नहीं जले। कॉरिडोर में जंबो कूलर लगवाए थे। पानी की भी माकूल व्यवस्था की थी।

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