बच्चों में टीबी के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच और पूरा इलाज जरूरी : डीडीसी

किशनगंज, 06 जुलाई (हि.स.)। जिले में बच्चों में तपेदिक (टीबी) की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। सोमवार को उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सिविल सर्जन एवं जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी के साथ टीबी स्क्रीनिंग कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में बच्चों में टीबी के छिपे लक्षणों की समय पर पहचान, व्यापक स्क्रीनिंग और शत-प्रतिशत उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में बताया गया कि बच्चों में टीबी की पहचान वयस्कों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। लगातार बुखार, वजन घटना, भूख कम लगना, कमजोरी, सुस्ती और दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी जैसे लक्षणों को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बच्चों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

उप विकास आयुक्त ने बताया कि जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश पर टीबी उन्मूलन अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक चिकित्सक को प्रतिदिन कम से कम 50 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग का लक्ष्य दिया गया है।

सभी प्रखंडों में चिकित्सकों के लिए स्क्रीनिंग, एक्स-रे और संभावित मरीजों की पहचान के अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। अगले 40 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी तथा प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसकी समीक्षा होगी।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि छोटे बच्चों में टीबी की पुष्टि करना कठिन होता है, क्योंकि वे थूक का नमूना नहीं दे पाते। ऐसे में यदि परिवार में किसी सदस्य को टीबी हो या बच्चा लंबे समय से बीमार हो तो तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने कहा कि टीबी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को दूर करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि टीबी पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है तथा सरकार की ओर से जांच, दवा और उपचार की सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डीएम नवीन कुमार ने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे में लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे सामान्य बीमारी मानकर अनदेखा न करें। समय पर जांच, नियमित दवा, पर्याप्त पोषण और परिवार के सहयोग से बच्चों को टीबी से सुरक्षित रखा जा सकता है।

   

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