झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल, जनता को नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं : राफिया नाज़
- DSS Admin
- Jun 01, 2026
रांची, 01 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हेमंत सोरन की सरकार और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है और मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में राफिया नाज़ ने कहा कि करोड़ों रुपये के बजट, बड़े-बड़े दावों और सरकारी विज्ञापनों के बावजूद राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है, लेकिन सरकार समस्याओं के समाधान के बजाय बहाने बनाने में व्यस्त है।
उन्होंने हाल ही में जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 13 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद उसके पिता को अपने बेटे का शव गोद में उठाकर अस्पताल से बाहर ले जाना पड़ा। अस्पताल प्रशासन न तो स्ट्रेचर उपलब्ध करा सका और न ही शव वाहन। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पूरे राज्य को शर्मसार करने वाली घटना बताया।
राफिया नाज़ ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने चाईबासा की उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक पिता अपने बच्चे के शव को थैले में रखकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अस्पतालों में कई बार एक ही बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया गया, जबकि संसाधनों की कमी के कारण कुछ स्थानों पर टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में ऑपरेशन तक करने पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस सुविधा की कमी के कारण कई गर्भवती महिलाओं को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया और समय पर इलाज नहीं मिलने से कई मामलों में जान तक गंवानी पड़ी। ये घटनाएं झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नर्सों और कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण वे आंदोलन करने को विवश हैं। जिन स्वास्थ्यकर्मियों पर लाखों मरीजों की जिम्मेदारी है, वे स्वयं आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह सरकार की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।
राफिया नाज़ ने आरोप लगाया कि रिम्स में मरीजों को एक्स-रे और दवाइयों जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को निजी केंद्रों से जांच करानी पड़ रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित हेल्थ कियोस्क भी उपयोग के अभाव में शोपीस बनकर रह गए हैं। जिन मशीनों का उद्देश्य मरीजों को आधुनिक और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना था, वे या तो बंद पड़ी हैं या उनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। इससे जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी हो रही है।
राफिया नाज़ ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अक्सर विभिन्न मुद्दों पर बयानबाजी करते दिखाई देते हैं, लेकिन अस्पतालों की वास्तविक समस्याओं पर उनकी चुप्पी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री अपने विभाग को लेकर गंभीर होते तो मरीजों को स्ट्रेचर, एम्बुलेंस, बेड, दवा, जांच और सम्मानजनक इलाज जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता।
उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार के लिए ठोस कदम उठाने तथा जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।--------

