काेरबा : भीषण गर्मी में तलमली गांव की अविरल जलधारा बनी लोगों के लिए राहत

काेरबा 25 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के काेरबा जिले के तलमली गांव में भीषण गर्मी के दौरान जहां एक ओर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां धरती की गोद से निकलने वाली अविरल प्राकृतिक जलधारा लोगों के लिए राहत का बड़ा सहारा बनी हुई है। जिले के कई गांवों में हैंडपंप और कुएं सूखने लगे हैं, लेकिन तलमली गांव की यह निर्मल जलधारा पूरे वर्ष समान गति से बहती रहती है। यही कारण है कि यह स्थान इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में ऊंचाई से गिरती ठंडी और स्वच्छ जलधारा राहगीरों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों की प्यास बुझा रही है। गर्मी के मौसम में भी यहां पानी की कमी महसूस नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह धारा इसी तरह बह रही है और आज तक इसका वास्तविक स्रोत किसी को ज्ञात नहीं हो सका है।

गांव के बुजुर्ग रामसाय कंवर बताते हैं कि उन्होंने बचपन से इस जलधारा को लगातार बहते हुए देखा है। उनका कहना है कि चाहे कितनी भी भीषण गर्मी क्यों न पड़ जाए, लेकिन यह धारा कभी नहीं सूखती। वहीं ग्रामीण महिला फूलमती बाई के अनुसार यह जलधारा गांव के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहां हमेशा साफ और ठंडा पानी उपलब्ध रहता है और आसपास के कई गांवों के लोग प्रतिदिन यहां पानी भरने पहुंचते हैं।

प्राकृतिक जलधारा के समीप स्थित प्राचीन शिव मंदिर इस स्थान की धार्मिक महत्ता को भी बढ़ाता है। स्थानीय लोग इसे आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम मानते हैं। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह स्थान लोगों के बीच विशेष पहचान बना चुका है।

विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए भी यह जलधारा शोध का विषय बनती जा रही है। भूगर्भीय दृष्टि से यह जानने की उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर ऐसा कौन-सा प्राकृतिक स्रोत है, जो भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बावजूद इस धारा को निरंतर जल प्रदान कर रहा है।

प्रदेशभर में जल संरक्षण और संवर्धन को लेकर चल रहे प्रयासों के बीच तलमली गांव की यह प्राकृतिक धारा एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। यह न केवल लोगों को पानी के महत्व का एहसास करा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि यदि प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण किया जाए, तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जीवनदायिनी बने रह सकते हैं।

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