उपराज्यपाल ने राष्ट्रविरोधी साहित्य के प्रसार के विरुद्ध की गई कार्रवाई की समीक्षा की
- Neha Gupta
- Jul 07, 2026

श्रीनगर, 07 जुलाई । उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रविरोधी और अलगाववादी सामग्री वाली पुस्तकों और साहित्य के प्रसार के संबंध में की गई कार्रवाई की समीक्षा की।
बैठक में मुख्य सचिव अटल दुल्लू; विद्युत विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्वनी कुमार, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्रकर भारती, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के. भंडारी, खुफिया ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक पंकज ठाकुर, सीआईडी के एडीजीपी नीतीश कुमार और विद्यालय शिक्षा विभाग के आयुक्त/सचिव राम निवास शर्मा उपस्थित थे।
अधिकारियों ने उपराज्यपाल को अलगाववाद का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों की बरामदगी के बारे में जानकारी दी और इस बात पर जोर दिया कि साहित्य की खरीद, अनुमोदन या प्रसार के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए उपराज्यपाल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे विश्वविद्यालयों, सरकारी और निजी कॉलेजों और स्कूलों, सार्वजनिक और निजी पुस्तकालयों आदि में राष्ट्र-विरोधी, अलगाववादी या आपत्तिजनक सामग्री वाले किसी भी प्रकाशन जिसमें पुस्तकें, पत्रिकाएँ, मैगज़ीन या कोई भी साहित्य शामिल है की खरीद, वितरण और उपलब्धता को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करें। इसमें इन संस्थानों के प्रमुखों द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर अपने-अपने संस्थानों में ऐसी किसी भी सामग्री की उपलब्धता के विरुद्ध पुष्टि करना शामिल होगा साथ ही व्यापक लेखापरीक्षा और निरीक्षण करना भी शामिल होगा।
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की वेबसाइटों और डिजिटल डेटाबेस की जांच करने और यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है तो उसे तुरंत हटाने का भी निर्देश दिया।
इस बात पर जोर देते हुए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों उपराज्यपाल ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री की खरीद को नियंत्रित करने वाली एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया। एसओपी में एक मजबूत जांच तंत्र का प्रावधान होना चाहिए जिसमें प्रख्यात शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक पैनल द्वारा आवधिक यादृच्छिक जांच शामिल हो ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्र-विरोधी या अलगाववादी विचारों को बढ़ावा देने वाली कोई भी सामग्री शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश न करे।
उपराज्यपाल ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की चूक के लिए कड़ी जवाबदेही तय की जाएगी और संबंधित संस्थान के प्रमुख को इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
शैक्षिक व्यवस्था की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान ज्ञान, राष्ट्र निर्माण और संवैधानिक मूल्यों के केंद्र बने रहने चाहिए और आपत्तिजनक साहित्य के माध्यम से छात्रों को गुमराह करने या कट्टरपंथी बनाने के किसी भी प्रयास को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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