शिमला में तीसरे दिन भी नहीं उठा कूड़ा, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को सीपीएम का समर्थन
- DSS Admin
- May 17, 2026
शिमला, 17 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। इससे शहर में कई जगह कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। सैहब सोसायटी के करीब 800 कर्मियों की हड़ताल के कारण डोर टू डोर गार्बेज कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है। कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं। दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन हड़ताली कर्मचारियों पर एस्मा लागू कर चुका है, जिसके बाद मामला और गर्मा गया है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि बंद कर दी गई है और उसकी जगह केवल 3 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि काम का बोझ लगातार बढ़ाया गया है, लेकिन सुविधाएं और वेतन नहीं बढ़ाए गए। शहर में कई इलाकों में घरों से कूड़ा नहीं उठने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी बीच सीपीआईएम जिला कमेटी शिमला ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया है और नगर निगम प्रशासन के फैसलों की आलोचना की है। पार्टी ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाने के फैसले को तानाशाही करार दिया है। पार्टी नेताओं विजेंद्र मेहरा, जगत राम और जयशिव ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर हड़ताल शुरू की है, ऐसे में उन पर सख्त कार्रवाई करना गलत है।
सीपीआईएम नेताओं ने सैहब कर्मियों के लिए 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि और 15 दिन की स्पेशल लीव बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा ग्रेच्युटी, पूरा बोनस, छुट्टियां, ईपीएफ और ईएसआई की सुविधाएं सही तरीके से लागू करने, समान काम के लिए समान वेतन देने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी उठाई गई है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन जनता से कूड़ा, पानी और प्रॉपर्टी टैक्स में हर साल बढ़ोतरी कर रहा है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की सुविधाओं पर खर्च नहीं किया जा रहा। नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारियों पर काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है। पहले एक कर्मचारी के जिम्मे करीब 80 घर होते थे, जो अब बढ़कर 300 तक पहुंच गए हैं।
सीपीआईएम ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम ने क्यूआर कोड व्यवस्था पर करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि इस राशि से नए कर्मचारियों को रोजगार दिया जा सकता था और मौजूदा कर्मचारियों का बोझ कम किया जा सकता था। पार्टी का कहना है कि कर्मचारियों को बोनस, छुट्टियां, ओवरटाइम और अतिरिक्त काम का भुगतान भी सही तरीके से नहीं दिया जा रहा है और श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है।
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