मिशन स्नेहजोरी से असम के मूगा उद्योग को मिलेगी नई गति : पबित्र मार्घेरिटा

गुवाहाटी, 03 जून (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री विदेश एवं कपड़ा राज्यमंत्री पबित्र मार्घेरिटा ने कहा है कि असम के पारंपरिक मूगा रेशम उद्योग को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 411 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी ‘मिशन मूगा सिल्क-स्नेहजोरी’ योजना शुरू की है। यह पहल असम सरकार और डोनर मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से लागू की जा रही है।

उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि तीन वर्षों तक चलने वाली इस परियोजना का उद्देश्य असम के विश्व प्रसिद्ध स्वर्णिम मूगा रेशम उद्योग का आधुनिकीकरण कर उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लक्जरी टेक्सटाइल क्षेत्र के रूप में विकसित करना है। इस मिशन से राज्य के लगभग 2.6 लाख बुनकरों, रेशम पालकों और उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

मार्घेरिटा ने कहा कि योजना के तहत असम में पांच आधुनिक मूगा रीलिंग इकाइयों की स्थापना की जाएगी तथा धेमाजी में एक समर्पित मूगा स्पन सिल्क मिल स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही मूगा उत्पादन के लिए आवश्यक सोम और सोआलू पौधों के 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्जीवन भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, मूगा रेशम के निर्यात को प्रोत्साहित करना तथा मूगा धागे के मूल्य में वृद्धि करना है। ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने के लिए 1,180 किसान हित समूह (एफआईजी) और 30 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि असम के मूगा रेशम की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर आधारित डिजिटल ट्रेसबिलिटी और जीआई प्रमाणीकरण प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा। साथ ही पारंपरिक मूगा उत्पादों को आधुनिक वैश्विक मांग के अनुरूप विकसित करने के लिए एक विशेष मूगा डिजाइन इनोवेशन लैब भी स्थापित की जाएगी।

यह क्लस्टर आधारित योजना राज्य के प्रमुख मूगा उत्पादक क्षेत्रों जैसे जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुवालकुची में लागू की जाएगी, जिससे असम की मूगा रेशम परंपरा को नई पहचान और वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान मिल सकेगा।

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