हिसार : गुरु जम्भेश्वर विवि व यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरीशस के बीच अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के लिए एमओयू
- Vijesh Sharma
- Jun 01, 2026

हिसार, 01 जून । गुरु जम्भेश्वर विज्ञान
एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं मॉरीशस की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ माॅरीशस के
मध्य शिक्षा, अनुसंधान, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान तथा जैव प्रौद्योगिकी एवं कृषि
विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता
ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य विकसित
हो रहे शैक्षणिक एवं अनुसंधान संबंधों का परिणाम है। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरीशस
की शोधार्थी स्रुती रामप्रोसेंड ने विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में उन्नत आणविक
जीवविज्ञान एवं जीन अभिव्यक्ति विश्लेषण से संबंधित शोध कार्य संपन्न किया। इस दौरान
उन्होंने सीडीएनए संश्लेषण (सीडीएनए सिंथेसिस), रियल-टाइम पीसीआर तथा सीआरआईएसपीआर
आधारित जीन संपादन जैसी आधुनिक तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग किया। इन अनुसंधान गतिविधियों
ने दोनों संस्थानों के मध्य वैज्ञानिक सहयोग को नई गति प्रदान की तथा भविष्य में संयुक्त
शोध परियोजनाओं और ज्ञान-साझाकरण के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई
ने साेमवार काे कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की वैश्विक
पहचान को सुदृढ़ करने तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को विस्तार देने
की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सहयोग के प्रमुख समन्वयक एवं जैव प्रौद्योगिकी
विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. विनोद छोकर ने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरीशस के साथ
स्थापित यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, वैज्ञानिक प्रकाशनों, शोध क्षमता
निर्माण तथा उभरते वैज्ञानिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगी।
विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के अधिष्ठाता
प्रो. ओम प्रकाश सांगवान ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीयकरण नीति
को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके माध्यम से छात्र एवं संकाय
विनिमय कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण पहलों, शोध सहयोग तथा अकादमिक गतिशीलता को प्रोत्साहन
मिलेगा, जिससे दोनों संस्थानों के मध्य दीर्घकालिक एवं सार्थक संबंध स्थापित होंगे।
दोनों विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भविष्य
में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, वैज्ञानिक प्रकाशनों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों
तथा शैक्षणिक आदान-प्रदान गतिविधियों को और अधिक विस्तार देने की प्रतिबद्धता व्यक्त
की। यह समझौता वैश्विक स्तर पर ज्ञान साझेदारी, अनुसंधान उत्कृष्टता तथा नवाचार को
बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

