अब बैठक नहीं मंगल मिलन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)

नयी दिल्ली। केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के संसदीय दल की बैठकों को अब ‘मंगल मिलन’ के नाम से जाना जाएगा क्योंकि ये बैठकें आमतौर पर मंगलवार को आयोजित की जाती हैं।  इन बैठकों में राजग के घटक दलों के सांसद भाग लेते हैं। मंगल मिलन के तहत पहली बैठक 21 जुलाई को संसद भवन परिसर में होगी। यह संसद के मानसून सत्र की सोमवार को शुरुआत होने के एक दिन बाद आयोजित की जाएगी। एक सूत्र ने कहा, राजग संसदीय दल की बैठक को अब 21 जुलाई की बैठक से मंगल मिलन के नाम से जाना जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस विषय पर हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी चर्चा हुई थी, जिसमें मंत्रियों को अनौपचारिक रूप से राजग संसदीय दल की बैठक का नाम बदले जाने की जानकारी दी गई। सरकार ने संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सूत्रों ने बताया कि यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा औपचारिक मान्यता दे दी जाती है, तो नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के दोनों सदनों के नेताओं को भी इस सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया जा सकता है। लोकसभा सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोडक़र एनसीपीआई का दामन थामा है, को इस पार्टी (एनसीपीआई) का क्रमश: सदन का नेता और मुख्य सचेतक बनाए जाने की संभावना है। पश्चिम बंगाल के ये दोनों सांसद, जिन्होंने पिछले महीने तृणमूल नेतृत्व के खिलाफ 18 अन्य सांसदों के साथ बगावत की थी और बाद में एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी, सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सदन में एनसीपीआई के 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था पर चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि एनसीपीआई नेताओं ने नये संसद भवन में पार्टी कार्यालय आवंटित किए जाने के मुद्दे पर भी लोकसभा अध्यक्ष के साथ चर्चा की। तृणमूल छोडक़र एनसीपीआई में शामिल हुए सांसदों ने बिरला को सूचित किया है कि उन्होंने सुदीप बंद्योपाध्याय को सदन में पार्टी का नेता, शताब्दी रॉय को उपनेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक नियुक्त किया है।

   

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