कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था सिक्किम के नाथुला से रवाना

गंगटोक, 20 जून (हि.स.)। कैलाश मानसरोवर के लिए तीर्थयात्रियों का पहला जत्था शनिवार को सिक्किम में नाथुला दर्रे (भारत-चीन सीमा) के रास्ते रवाना हुआ। सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने नाथुला में एक औपचारिक कार्यक्रम के बीच तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को झंडा दिखाकर रवाना किया।

कोविड महामारी के बाद सिक्किम के नाथुला दर्रे के माध्यम से पवित्र कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा फिर से शुरू हो गई है। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था नई दिल्ली से 15 जून राजधानी गंगटोक पहुंचा। सिक्किम में तीर्थयात्रियों को अनुकूलन के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रखा गया था। पांच दिन बाद यात्री आज नाथुला के रास्ते चीन में प्रवेश करते हुए कैलाश मानसरोवर के लिए रवाना हो गए।

हिंदू धर्म में सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाने वाला यह यात्रा भक्तों को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक ले जाता है। तीर्थ यात्रियों की पहली जत्था में कुल 47 लोग हैं, जिनमें दो संपर्क अधिकारी, एक डॉक्टर और चार सहायक कर्मचारी शामिल होते हैं। इनमें से 41 तीर्थयात्री हैं।

नाथुला में राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने तीर्थयात्रियों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य और तैयारियों के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए इस यात्रा के पहले जत्थे में शामिल होना एक ऐतिहासिक और गर्व का अवसर था, जो पिछले साल छह साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुई है। इसके बाद राज्यपाल ने 14,140 फीट की ऊंचाई पर स्थित नाथुला दर्रे के माध्यम से तीर्थयात्रियों को झंडी दिखाकर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के लिए रवाना किया।

कार्यक्रम तालिका के अनुसार, पहला जत्था आज तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के गंगजी पहुंचने की उम्मीद है। मानसरोवर परिक्रमा 27 जून, 2026 को प्रस्तावित है, जबकि दल का 1 जुलाई, 2026 को फिर से गंगटोक लौटने का कार्यक्रम है।

इस अवसर पर सिक्किम सरकार के पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री टीटी भोटिया, पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव राजकुमार यादव, गंगटोक जिले के जिलापाल रोहन अगवाने, आईटीबीपी और जाट रेजिमेंट के अधिकारी और अन्य संबंधित हितधारक समारोह में उपस्थित थे।

---------------

   

सम्बंधित खबर