उपराज्यपाल ने हरमुख गंगबल तीर्थयात्रा को दिखाई हरी झंडी

श्रीनगर, 18 सितंबर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को गांदरबल में पवित्र हरमुख-गंगबल तीर्थयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत के गौरवशाली अतीत और जीवंत वर्तमान के बीच एक पवित्र सेतु है। यह शुद्धता, भक्ति और विविधता में एकता का प्रतीक होने के साथ हमारी आत्मा को मजबूत करती है तथा मनुष्य को प्रकृति के करीब लाती है।

 
समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की भूमि हजारों वर्षों से आस्था की अखंड धारा से पोषित होती रही है। कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ में भी इस प्रदेश की धरती के प्रत्येक कदम में समाहित आध्यात्मिक ऊर्जा का उल्लेख मिलता है।
 
‘नीलमत पुराण’ का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हरमुख पर्वत, जिसे हरमुकुट भी कहा जाता है, भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में पूजनीय है। समुद्र तल से लगभग 14,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित गंगबल झील को मां गंगा की पवित्र उपस्थिति माना जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव के बावजूद श्रद्धालुओं ने इस तीर्थस्थल के साथ अपना आध्यात्मिक संबंध बनाए रखा है।
 
उन्होंने कहा कि यह तीर्थस्थल पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है और इसकी पवित्रता की तुलना हरिद्वार से की जाती है।
 
उपराज्यपाल ने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि हरमुख-गंगबल तीर्थयात्रा हमारी अमर आस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है। यात्रा के दौरान कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। सभी सत्य के साधक होते हैं और आध्यात्मिकता से एकजुट रहते हैं। यही हमारी सनातन संस्कृति की शक्ति है।”
 
उन्होंने कहा कि हिमालयी तीर्थयात्राएं हमें प्रकृति के सामने विनम्र रहना सिखाती हैं। साथ ही सभी दिशाओं से श्रेष्ठ और कल्याणकारी विचार ग्रहण करने की प्रेरणा देती हैं, जिससे समाज में समृद्धि एवं सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
 
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने श्रद्धालुओं से प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हरमुख-गंगबल जैसी आध्यात्मिक यात्राएं राष्ट्र की आत्मा और सामूहिक चेतना को मजबूत करती हैं।
 
उन्होंने कहा, “हिमालयी तीर्थयात्राएं हमें दो महत्वपूर्ण शिक्षाएं देती हैं। पहली, हम प्रकृति के मालिक नहीं, बल्कि उसके संरक्षक हैं। दूसरी, हमारे पास सभी दिशाओं से श्रेष्ठ और लाभकारी विचार आने चाहिए, ताकि हम समाज को अधिक समृद्ध बना सकें। हमारी सनातन संस्कृति में तीर्थयात्रा हमेशा सामाजिक सद्भाव की एक बड़ी शक्ति रही है।”
 
उपराज्यपाल ने कहा कि तीर्थयात्रा श्रद्धालुओं को शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करने के साथ प्रकृति के करीब भी लाती है। यात्रा के दौरान यह अनुभव होता है कि प्रकृति हमारी विरासत है और उसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। हरमुख-गंगबल तीर्थयात्रा युवा पीढ़ी को यह संदेश देने का भी अवसर है कि सनातन संस्कृति केवल वर्तमान की चेतना ही नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती है।
 
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर 25 वर्षों की जनसेवा को समर्पित चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ का भी उल्लेख किया। उपराज्यपाल ने नागरिकों और हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट से स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर, पौधरोपण तथा युवाओं से संबंधित कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।
 
उपराज्यपाल ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “हरमुख की बर्फ से ढकी चोटियां हमें ऊंचे विचारों को अपनाने की प्रेरणा दें और भगवान शिव की कृपा एवं करुणा सभी तीर्थयात्रियों पर बनी रहे।”
 
इस अवसर पर सांसद मियां अल्ताफ अहमद, कंगन के विधायक मियां मेहर अली, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मनदीप के. भंडारी, हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष एवं महासचिव विनोद पंडिता, कश्मीर के मंडलायुक्त अंशुल गर्ग, आईजीपी कश्मीर सुजीत कुमार, गांदरबल के उपायुक्त जतिन किशोर, ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल भट्ट, धार्मिक नेता, वरिष्ठ नागरिक एवं पुलिस अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

   

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