भीषण गर्मी व खराब मौसम में भी निर्बाध आपूर्ति में जुटा बिजली विभाग

-उत्तर प्रदेश में 28 मई को 30,580 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई

लखनऊ, 29 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने दावा किया है कि आम जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए बिजली विभाग लगातार सक्रिय है। यूपीपीसीएल की लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई के चलते महानगरों, जिला मुख्यालयों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था बेहतर बनी हुई है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर आने वाले फॉल्ट को तुरंत ठीक कराने के लिए विभागीय टीम लगातार फील्ड में काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपीपीसीएल शहर से लेकर गांव तक निर्बाध और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से जुटा हुआ है। हालांकि बीते कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, हवा और बारिश के कारण विद्युत अवसंरचना को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने, तार टूटने और पोल क्षतिग्रस्त होने की वजह से बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। हालांकि ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी यूपीपीसीएल पूरी मुस्तैदी के साथ जुटा हुआ है।

उप्र. पावर कारपोरेशन लि. के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों की टीम लगातार फील्ड में रहकर क्षतिग्रस्त लाइनों और उपकरणों को ठीक किया जा रहा है। जहां-जहां आपूर्ति बाधित हुई है, वहां तेजी से मरम्मत कार्य कराकर सप्लाई बहाल की जा रही है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि आपदा या खराब मौसम के दौरान होने वाले ब्रेकडाउन को तत्काल ठीक करने के लिए सामग्री प्रबंधन और मानव संसाधन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

28 मई को 30,580 मेगावाट की गई बिजली आपूर्ति

निदेशक वितरण ने कहा कि अनुरक्षण कार्यों के लिए निर्धारित बजट के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बिजली व्यवस्था बहाल करने और मरम्मत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आने पाए। वहीं प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग के बावजूद यूपीपीसीएल लगातार डिमांड बिजली की आपूर्ति कर रहा है। 26 मई को 28 हजार 125 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। 27 मई को 30 हजार 329 मेगावाट और 28 मई को 30 हजार 580 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई है। 28 मई को उत्तर प्रदेश डिमांड बिजली की आपूर्ति करने में तमिलनाडु, पंजाब और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों से आगे हैं।

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