सरकारी दफ्तरों से बाजार तक ऊर्जा बचत की मुहिम, डीएम ने लागू किए नए नियम

चंपावत, 18 मई (हि.स.)। वैश्विक हालात और लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच चम्पावत जिला प्रशासन अब ऊर्जा बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर गंभीर हो गया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सरकारी विभागों से लेकर निजी संस्थानों तक के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी करते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया है।

नई व्यवस्था के तहत सरकारी बैठकों में अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता दी जाएगी और बेहद जरूरी होने पर ही अधिकारियों की भौतिक मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। वहीं निजी संस्थानों को भी वर्क फ्रॉम होम संस्कृति अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है।

प्रशासन ने सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या आधी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा होटल, मॉल, रेस्तरां और अन्य भवनों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने को कहा गया है, ताकि बिजली और ईंधन की खपत कम की जा सके। अनावश्यक रोशनी और सजावटी लाइटिंग पर भी नियंत्रण रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

जिलाधिकारी ने हर शनिवार को ‘नो व्हीकल डे’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस दौरान कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जनपद में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी किया जाएगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए “मेड इन उत्तराखण्ड” अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और जीआई टैग उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बनाई गई है। प्रशासन का फोकस पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने पर भी रहेगा, जिसके तहत धार्मिक, ग्रामीण, वेलनेस और इको-टूरिज्म सर्किटों का प्रचार किया जाएगा।

ऊर्जा बचत के साथ स्वास्थ्य पर भी जोर देते हुए प्रशासन ने कम तेल वाले भोजन को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। आशा कार्यकर्ताओं और महिला समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जबकि स्कूलों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा की जाएगी।

कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती और जीरो बजट फार्मिंग को प्रोत्साहित करने की योजना है। वहीं ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं और पीएनजी कनेक्शन विस्तार को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि ऊर्जा संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग में प्रशासन का सहयोग करें।

   

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