एआई के दौर में भी आंतरिक लेखा परीक्षण की भूमिका अहम : राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि

कोलकाता, 19 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रविंद्र नारायण रवि ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बावजूद आंतरिक लेखा परीक्षण (इंटरनल ऑडिट) की आवश्यकता कम नहीं हुई है। इसे केवल नियंत्रण और समीक्षा तक सीमित न रखकर विश्वास, जवाबदेही और सुशासन के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

शुक्रवार को कोलकाता के एक होटल में आयोजित ‘जॉइंट ऑडिट कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भविष्य उन्हीं संस्थाओं का है जो डिजिटल परिवर्तन को तेज गति से अपनाने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग भी सुनिश्चित करेंगी। उन्होंने कहा कि सुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने में आंतरिक लेखा परीक्षण की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल ऑडिटर्स इंडिया के कोलकाता चैप्टर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान, भारतीय लागत एवं प्रबंधन लेखाकार संस्थान, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान तथा सूचना प्रणाली लेखा एवं नियंत्रण संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का विषय था – “इंटरनल ऑडिट : विश्वास, प्रौद्योगिकी और परिवर्तनकारी सुशासन”।

कोलकाता चैप्टर के अध्यक्ष अभिन मुखोपाध्याय ने कहा कि आंतरिक लेखा परीक्षण का पेशा वर्तमान में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब संस्थाएं लेखा परीक्षकों से केवल जोखिम मूल्यांकन ही नहीं, बल्कि रणनीतिक परामर्श की भी अपेक्षा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, पर्यावरणीय एवं सामाजिक जवाबदेही आश्वासन तथा डिजिटल सुशासन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि तेजी से बदल रहे प्रौद्योगिकी आधारित वातावरण में लेखा परीक्षण प्रणाली को अधिक आधुनिक, आंकड़ा आधारित और रणनीतिक बनाना आवश्यक है। साथ ही पारदर्शिता, नैतिकता और जवाबदेही के संतुलन को बनाए रखते हुए संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।

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