हरियाणा सरकार का फैसला : एनसीआर में अब सिर्फ सीएनजी और ईवी गाड़ियां
- DSS Admin
- May 18, 2026
चंडीगढ़, 18 मई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कड़ा फैसला लेते हुए एनसीआर में सीएनजी और ईवी गाड़ियों को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में साेमवार काे हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा मोटर व्हीकल रूल्स-1993 में संशोधन को मंजूरी देते हुए एग्रीगेटर, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब 1 जनवरी 2026 से एनसीआर में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहन ही नए फ्लीट में शामिल किए जा सकेंगे। इस बदलाव के जरिये सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और हरियाणा में ‘क्लीन मोबिलिटी मॉडल’ को तेजी से लागू करना है। एनसीआर क्षेत्र में एग्रीगेटर, डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स कंपनियां अपने बेड़े में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), बैटरी ऑपरेटेड व्हीकल (बीओवी) या अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहन ही शामिल कर सकेंगी। इसके अलावा मौजूदा फ्लीट में शामिल किए जाने वाले नए ऑटो रिक्शा भी केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ही होंगे। कैबिनेट ने हरियाणा मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 86ए को बदलते हुए ऐप आधारित यात्री सेवाओं और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। अब एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। साथ ही ड्राइवर ऑनबोर्डिंग, वाहन सत्यापन, साइबर सुरक्षा, किराया निर्धारण और शिकायत निवारण से जुड़े सख्त नियम लागू होंगे। नई नीति में दिव्यांगजन अनुकूल वाहनों को शामिल करने और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार के अनुसार, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होगी, जिससे प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। नई नीति के तहत वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना जरूरी होगा। इसके साथ ही कंपनियों को 24x7 कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी स्थापित करने होंगे, ताकि यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवर देना होगा। इसके अलावा ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया है। सरकार ने इसे ‘ड्राइवर वेलफेयर मॉडल’ का हिस्सा बताया है, ताकि ऐप आधारित परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल सके। यही नहीं, अब ड्राइवर और वाहनों का सत्यापन ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए किया जाएगा। कंपनियों को ऑनबोर्ड किए गए सभी ड्राइवरों और वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
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