पार्किंग ठेकों में दोहरा मापदंड:ओवरचार्जिंग वाली फर्म को क्लीन चिट की तैयारी, दूसरी को बैंक गारंटी न देने पर नोटिस
- Neha Gupta
- Jul 03, 2026
भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम का एस्टेट विभाग पार्किंग ठेकों को लेकर दोहरा मापदंड अपना रहा है। गुरु नानक भवन पार्किंग में ओवरचार्जिंग करने वाली फर्म को क्लीन चिट देने की सिफारिश की गई है, जबकि पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्केट की पार्किंग में राधेश्याम कंपनी की ओर से 50% बैंक गारंटी जमा न कराने पर ठेका रद्द करने का नोटिस जारी कर दिया गया था। हालांकि, सख्ती के बाद कंपनी ने 10.50 लाख रुपए जमा करवा दिए हैं। एक ठेकेदार का आरोप है कि एस्टेट विभाग के अफसरों-कर्मियों की कुछ फर्मों से मिलीभगत है। इसलिए उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाने का खेल लंबे समय से चला आ रहा है। अक्टूबर 2024 को 31 लाख रुपए सालाना की दर से एक कंपनी को पार्किंग स्टैंड आवंटित किया गया था। नवंबर 2025 तक ठेकेदार पर कुल 33.50 लाख का बकाया था। ठेकेदार ने करीब 15.50 लाख का ही भुगतान किया। 18 लाख रुपए पेंडिंग होने के बावजूद नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। एस्टेट अफसर की ओर से 23 फरवरी 2026 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्केट के पार्किंग ठेकेदार राधे श्याम कंपनी को 3 दिन का अंतिम नोटिस जारी कर ठेका रद्द करने की चेतावनी दी गई थी। फर्म को ई-टेंडरिंग के जरिए एक साल के लिए यह पार्किंग स्टैंड अलॉट हुआ था और 27 नवंबर 2025 को ऑफर लेटर भी दे दिया गया था। एस्टेट अफसर के मुताबिक, ठेकेदार ने नियमों के मुताबिक कुल कीमत की 50% बैंक गारंटी निगम फंड में जमा नहीं करवाई। निगम के साथ 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट तक नहीं किया गया। ऐसे में ठेका रद्द किया जाए। फिलहाल, अब कंपनी ने 10.50 लाख रुपए की एकमुश्त राशि चेक के माध्यम से निगम को सौंप दी है। चौहान एंटरप्राइजेज ने गुरु नानक भवन पार्किंग के ठेकेदार आर्यन मट्टू की फर्म के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आर्यन मट्टू के पिता निगम में बतौर पुलिस मुलाजिम कार्यरत थे। जो गुरुनानक भवन पार्किंग में ओवर चार्जिंग करते रहे। जिस पर बीते 4 जून को एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी की मीटिंग हुई थी। इसमें ठेकेदार ने अपनी तरफ से लिखित में सफाई पेश की कि वह 24 घंटे के केवल 100 रुपए वसूल रहा है और रसीद से छेड़छाड़ हुई है। वहीं एक ठेकेदार ने अधिकारियों की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौके पर सीसीटीवी फुटेज नहीं खंगाली। वरना, गुरु नानक भवन की पार्किंग साइट पर किस तरह से पार्किंग फीस वसूली जा रही थी, वहां कौन बैठता था, सारी सच्चाई सामने आ जाती। यहां पुलिस-निगम अफसरों और नेताओं को खुश करने वाले होर्डिंग भी लगे हुए हैं। इस होर्डिंग में आर्यन मट्टू व उनके पिता की फोटो भी लगी हुई है। क्या यह सब किसी अफसर को नजर नहीं आता। हैरान करने वाली बात यह है कि आर्यन मट्टू फर्म के बचाव में पार्किंग क्लर्क अरविंदर सिंह ने अपनी 26 जून की रिपोर्ट में वित्तीय हितों का हवाला देते उच्च अधिकारियों से अपील की है कि आर्यन मट्टू ठेकेदार के खिलाफ शिकायत को दाखिल दफ्तर (बंद) कर दिया जाए। लेकिन सवाल उठ रहे कि फर्म के खिलाफ अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद क्या अफसरों को इसे मान लेना चाहिए। यदि नहीं तो आज तक फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की बजाए ओल्ड सब्जी मंडी का ठेका देकर अवार्ड क्यों दे दिया गया? 4 साल से भी अधिक समय से लगातार एक ही फर्म को ठेका कैसे अलॉट होता आ रहा है। क्या जांच में आर्यन मट्टू की तरफ से सफाई पेश करना व क्लर्क द्वारा बचाव की सिफारिश करना ही जांच के लिए पर्याप्त था। ऐसे कई सवाल हैं, जो जांच में भी मिलीभगत की तरफ इशारा करते हैं? पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्केट की पार्किंग।

