सिलीगुड़ी में ‘महाकाल महातीर्थ’ परियोजना पर अनिश्चितता, काम धीमा

सिलीगुड़ी, 14 मई (हि. स.)। माटीगाड़ा उपनगर के पास खाली पड़ी जमीन पर बनने वाला बहुचर्चित ‘महाकाल महातीर्थ’ प्रोजेक्ट अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इसी साल की शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़े धूमधाम से इस परियोजना की आधारशिला रखी थी, लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।

यह परियोजना करीब 17.81 एकड़ जमीन पर विकसित की जानी थी, जिसमें 108 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा और देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां बनाने की योजना थी। इसे ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि सिलीगुड़ी को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

हालांकि, अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी है।

राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद यह परियोजना दुविधा का विषय बन गई है। एक ओर हिंदुत्व की विचारधारा के चलते मंदिर निर्माण को रोकना आसान नहीं है, वहीं दूसरी ओर सरकारी फंड से मंदिर निर्माण को लेकर पहले जताए गए विरोध के कारण नई सरकार के सामने आर्थिक व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन गई है।

इस बीच, परियोजना के लिए गठित ट्रस्ट बोर्ड को भी नई अधिसूचना के बाद भंग कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी असमंजस की स्थिति बन गई है।

अधिकारियों का कहना है कि अब नई सरकार की नीति का इंतजार करना होगा।

सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव ने भी इस मुद्दे पर अनिश्चितता जताते हुए कहा कि नई सरकार इस परियोजना को लेकर क्या फैसला लेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इस तरह की बड़ी परियोजना से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी के विधायक आनंदमय बर्मन और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने भी उम्मीद जताई है कि परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने भी मंदिर निर्माण के पक्ष में राय दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी सरकार के लिए सीधे मंदिर निर्माण में फंड देना संभव नहीं है, इसलिए वित्तीय स्रोत तय करना जरूरी है।

फिलहाल, परियोजना स्थल पर धीमी गति से कुछ काम जारी है, लेकिन यह भव्य ‘महाकाल महातीर्थ’ कब पूरा होगा, इसे लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं है।

   

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