बिजली दरों में बढ़ोतरी पर भाजपा ने नेकां सरकार को घेरा
- Rahul Sharma
- Aug 26, 2026
जम्मू। स्टेट समाचार
जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रवक्ता डॉ. अभिजीत सिंह जसरोटिया ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनता से किया गया विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा करने वाली सरकार अब बिजली दरों में बढ़ोतरी कर आम लोगों, खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। जम्मू के त्रिकुटा नगर स्थित भाजपा मुख्यालय में मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप महोत्रा के साथ आयोजित प्रेस वार्ता में जसरोटिया ने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होगा। उन्होंने बिजली के बल्ब को प्रतीक के रूप में प्रदर्शित करते हुए कहा कि करन, दूरू (अनंतनाग) और रियासी के कई गांवों तक बिजली की सुविधा 2019 के बाद पहुंची। उन्होंने सवाल किया कि जिन क्षेत्रों के लोगों को दशकों तक मूलभूत बिजली सुविधा का इंतजार करना पड़ा, उन पर आज बिजली दरों में बढ़ोतरी का बोझ क्यों डाला जा रहा है। जसरोटिया ने नेकां के 2024 विधानसभा चुनाव घोषणापत्र की प्रतियां दिखाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने चुनाव के दौरान 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत कई वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों को पूरा करने के बजाय जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने एक लाख रोजगार, राशन वितरण और एलपीजी सिलेंडर से जुड़े वादों को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन नुकसान कम करने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में सरकार को अपने नुकसान और व्यवस्थागत कमियों को दूर करना चाहिए, न कि उसका भार आम उपभोक्ताओं पर डालना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान जसरोटिया ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मीडिया को लेकर हालिया ‘गुलदस्ता’ टिप्पणी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। भाजपा नेताओं ने उमर अब्दुल्ला सरकार से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी तत्काल वापस लेने और विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी प्रशासनिक कमियों का भार जनता पर डालने के बजाय चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।

