बलरामपुर : चिरायु योजना से बदली देविक की जिंदगी, अब सुन पा रहा अपनों की आवाज
- DSS Admin
- Jun 19, 2026
बलरामपुर, 19 जून (हि.स.)। शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई रोशनी और नई उम्मीद लेकर आ रही हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके-चिरायु) के माध्यम से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को समय पर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड कुसमी के ग्राम चौनपुर निवासी तीन वर्षीय देविक कुमार यादव को चिरायु योजना के तहत उपचार का लाभ मिला, जिसके बाद वह अब अपने परिजनों की आवाज सुन पा रहा है।
देविक के पिता पुरंदर यादव ने शुक्रवार काे बताया कि उनका पुत्र जन्म से ही सुनने संबंधी गंभीर समस्या से पीड़ित था। उपचार के लिए उन्होंने कई विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया और अन्य राज्यों में भी जांच कराई, लेकिन इलाज का खर्च उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर था। इसी दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने देविक की स्वास्थ्य जांच की और परिजनों को चिरायु योजना के तहत उपलब्ध निःशुल्क उपचार की जानकारी दी।
आरबीएसके टीम के सहयोग से देविक को उपचार के लिए एम्स रायपुर रेफर किया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न जांचों के बाद 25 फरवरी 2026 को उसका सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की श्रवण क्षमता में सकारात्मक सुधार हुआ है और अब वह सामान्य बच्चों की तरह ध्वनियों को सुनने लगा है।
देविक के पिता ने इस निःशुल्क उपचार के लिए शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति के कारण जिस उपचार की वे कल्पना भी नहीं कर सकते थे, वह चिरायु योजना की बदौलत संभव हो सका।
क्या है कॉक्लियर इम्प्लांट?
कॉक्लियर इम्प्लांट एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसका उपयोग उन बच्चों में किया जाता है जो जन्म से सुनने में असमर्थ होते हैं या जिनकी श्रवण क्षमता अत्यंत कम होती है। यह उपकरण कान के क्षतिग्रस्त हिस्से को बायपास कर सीधे श्रवण तंत्रिका तक ध्वनि संकेत पहुंचाता है, जिससे बच्चा ध्वनियों को सुनने, समझने और धीरे-धीरे बोलना सीख सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर किया गया कॉक्लियर इम्प्लांट बच्चों के भाषा विकास, शिक्षा और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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