डॉ. रूमा देवी का संवाद कार्यक्रम : महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के धरातलीय हालातों पर मंथन

जयपुर, 19 मई (हि.स.)। राजस्थान सरकार के प्रतिष्ठित हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर के बी.एस. मेहता ऑडिटोरियम में आज नागरिक एवं पुलिस सेवाओं के नवनियुक्त प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रख्यात हस्तशिल्प डिजाइनर, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वैश्विक वक्ता डॉ. रूमा देवी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।

सत्र में संस्थान में इन-सर्विस प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, राजस्थान पुलिस सेवा तथा राजस्थान लेखा सेवा के लगभग 400 प्रशिक्षु अधिकारियों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया।

संवाद सत्र के दौरान डॉ. रूमा देवी ने शून्य से शिखर तक की अपनी प्रेरणादायी और संघर्षपूर्ण जीवन-यात्रा साझा की।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार थार के सुदूर ग्रामीण परिवेश की विपरीत परिस्थितियों, सामाजिक रूढ़िवादिता और अत्यंत सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कदम बढ़ाया और हजारों ग्रामीण महिलाओं को हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, कौशल विकास एवं स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया।

डॉ. रूमा देवी ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में वास्तविक और स्थायी बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि धरातल पर संवेदनशीलता, निरंतर प्रयासों और समर्पण से ही संभव है।

उन्होंने ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान के लिए किए गए अपने संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से पूरी संवेदनशीलता के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का आह्वान किया ताकि प्रशासनिक तंत्र के प्रति जनता का विश्वास सुदृढ़ हो सके।

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में, भारत सरकार के फिल्म्स डिवीजन द्वारा रूमा देवी के जीवन और सामाजिक कार्यों पर निर्मित एक मर्मस्पर्शी डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस लघु फिल्म ने ऑडिटोरियम में मौजूद सभी अधिकारियों को गहरे तक प्रेरित किया।

सत्र के अंतिम चरण में एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें युवा प्रशिक्षु अधिकारियों ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण रोजगार सृजन, स्वयं सहायता समूहों के सुदृढ़ीकरण और महिला नेतृत्व क्षमता से जुड़े व्यवहारिक प्रश्न पूछे। डॉ. रूमा देवी ने अपने जमीनी अनुभवों के आधार पर सभी जिज्ञासाओं का अत्यंत सहजता से समाधान किया।

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. प्रभा व्यास, अतिरिक्त निदेशक ने डॉ. रूमा देवी के जन-कल्याणकारी कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि रूमा देवी का अनुभव, अदम्य साहस और सफलता की कहानी प्रशासनिक सेवाओं में आ रहे युवा अधिकारियों के लिए एक उत्कृष्ट प्रेरणास्रोत का कार्य करेगी, जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में अधिक संवेदनशील और परिणामोन्मुखी बन सकेंगे।

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