बकरीद को लेकर झारखंड में विशेष सतर्कता, स्पेशल ब्रांच ने जिलों को जारी किया अलर्ट

रांची, 23 मई (हि.स.)। झारखंड पुलिस की विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) ने आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) त्योहार को लेकर राज्य के सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश जारी किया है। विभाग ने पूर्व में इस त्योहार के दौरान विभिन्न जिलों में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए तथा संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए समय रहते आवश्यक एहतियाती कदम उठाने पर जोर दिया है।

विशेष शाखा की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि इस वर्ष बकरीद 28 मई को मनाए जाने की संभावित तिथि है, हालांकि चांद दिखने के आधार पर इसमें परिवर्तन भी संभव है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बकरीद के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करते हैं, जिससे कई स्थानों पर भीड़ अधिक होने के कारण यातायात प्रभावित होने की संभावना रहती है।

इसके अतिरिक्त, नमाज के उपरांत आगामी तीन दिनों तक विभिन्न स्थानों पर कुर्बानी की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। इस दौरान पशु तस्करी की संभावनाओं को देखते हुए विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से आने वाले मार्गों पर अवैध पशु परिवहन पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेष शाखा ने यह भी कहा है कि पर्व के दौरान कुछ संवेदनशील परिस्थितियों में विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शन की आशंका रहती है, जिसके चलते कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही आशंका जताई गई है कि असामाजिक तत्व धार्मिक स्थलों के आसपास जानवरों के अवशेष फेंककर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में सभी जिलों को सतर्क रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

पत्र में पूर्व की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें वर्ष 2020 में हजारीबाग, 2017 में गिरिडीह, 2018 में बोकारो तथा 2018 में ही पाकुड़ में बकरीद के दौरान उत्पन्न सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं शामिल हैं। इन उदाहरणों का हवाला देते हुए इस बार विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है। विशेष शाखा ने निर्देश दिया है कि व्हाट्सएप, फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे ग्रुपों और पोस्टों पर नजर रखी जाए, जो किसी धर्म, समुदाय या जाति विशेष की भावनाओं को आहत कर सकते हैं।

जिला प्रशासन को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति समिति की बैठकें आयोजित करने और स्थानीय स्तर पर संवाद बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।

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