कानपुर में पर्यावरण संरक्षण को रफ्तार, बिल्हौर में तैयार होगा 17,500 पौधों का 'ऊर्जा वन'

-'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत हाजीपुर गांव में विकसित होगी अनूठी हरित पट्टी-पारंपरिक वनों से अलग, पूरी तरह ईंधन और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने वाले विशेष पौधों का होगा रोपण

कानपुर, 12 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जन आंदोलन का रूप देने के लिए कानपुर जिला प्रशासन ने एक बेहद अनोखी और उपयोगी हरित कार्ययोजना तैयार की है। इस विशेष पहल के अंतर्गत जनपद की बिल्हौर तहसील के हाजीपुर गांव में 17,500 पौधों का 'ऊर्जा वन' विकसित किया जाएगा। इस विजन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन और ऊर्जा की स्थानीय जरूरतों को पूरा करना है।

वन विभाग की नर्सरियों से पौधों का उठान 15 जून से प्रारंभ करने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि मानसून के आगमन के साथ ही जुलाई के प्रथम सप्ताह में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारा जा सके। बिल्हौर का यह ऊर्जा वन आने वाले समय में न सिर्फ क्षेत्र के इको-सिस्टम को सुधारेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जिले को एक नई और विशिष्ट पहचान भी दिलाएगा।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को बताया कि बिल्हौर में विकसित होने वाला 17,500 पौधों का 'ऊर्जा वन' दूरगामी सोच और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता का प्रतीक है। यह केवल एक सरकारी लक्ष्य को पूरा करने का प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित व बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। शासन की मंशा के अनुरूप 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को हमें कानपुर में एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देना है।

बता दें कि जिले में इस वर्ष 35 लाख 84 हजार 556 पौधों के रोपण का महालक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी तैयारियों को लेकर वन विभाग की 27 नर्सरियों में करीब 52 लाख पौधे पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा, जनपद के दो प्रमुख मार्गों को विशेष पहचान दी जाएगी। रमईपुर-साढ़-जहानाबाद मार्ग के दोनों ओर पीपल के पौधे और गंगा बैराज से मंधना मार्ग तक अमलतास के पौधों का रोपण किया जाएगा।

   

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