चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 66वें दिन यज्ञ उपासना का संदेश, अंधविश्वास से दूर रहने की अपील

Message of Yagya worship on the 66th day of Yagyanushthan of the four Vedas, appeal to stay away from superstition


कठुआ, 16 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 66वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अमावस्या के आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा कि अमावस्या का दिन अत्यंत शुभ होता है जब सूर्य और चन्द्रमा एक साथ रहते हैं। सूर्य तेजस्विता और प्रकाश का प्रतीक है जबकि चन्द्रमा आनन्द और प्रसन्नता का प्रतीक है। इस दिन इन दिव्य गुणों को अपने जीवन में धारण करने का प्रयास करना चाहिए। अथर्ववेद के मन्त्र 7/79/1 की व्याख्या करते हुए स्वामी जी ने बताया कि अमावस्या के दिन विद्वान और वेदज्ञ लोग मिलकर श्रेष्ठ यज्ञ करते हैं, जिससे जीवन में समृद्धि और उत्तम संतानों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इस दिन यज्ञ और उपासना के माध्यम से प्रभु की आराधना की जाती है। स्वामी जी ने यह भी कहा कि वेदों के अनुसार अमावस्या को भूत-प्रेतों से जोड़ना अज्ञानता है। उन्होंने पशु बलि और शराब सेवन जैसी कुप्रथाओं को वेद-विरुद्ध बताते हुए श्रद्धालुओं से इनसे दूर रहने की अपील की।

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