पश्चिम बंगाल में 20 जून को मनाया जाएगा ‘राज्य दिवस’, कैबिनेट ने दी मंजूरी

कोलकाता, 03 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि 20 जून को आधिकारिक रूप से ‘पश्चिम बंगाल राज्य दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। यह निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि 20 जून, 1947 को तत्कालीन बंगाल विधानसभा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव ने बंगाल के विभाजन और पश्चिम बंगाल राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त किया था। इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 20 जून को ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

दिलीप घोष ने कहा कि अब से हर वर्ष 20 जून को राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे पहले भाजपा 20 जून को ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के रूप में मनाती रही है, जबकि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइशाख’ के दिन, यानी 14 या 15 अप्रैल को राज्य दिवस मनाती थी।

मंत्री ने यह भी घोषणा की कि जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पूरे राज्य में वर्षभर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई जाएगी। डॉ. मुखर्जी की जयंती 6 जुलाई को मनाई जाती है।

उन्होंने बताया कि वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों के संचालन के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें मंत्री, विधायक और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा 6 जुलाई को एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें चयनित स्थान पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य की ‘मां आहार’ योजना के विस्तार का भी निर्णय लिया गया। दिलीप घोष ने बताया कि वर्तमान में 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने वाली यह योजना राज्य के 390 केंद्रों पर संचालित हो रही है, जिसे बढ़ाकर 500 केंद्रों तक किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि, पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने ‘मां कैंटीन’ परियोजना के तहत 5 रुपये में अंडा-चावल भोजन योजना शुरू की थी। भाजपा सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए समान दर पर मछली युक्त भोजन उपलब्ध कराना शुरू किया है। अब यह योजना ‘मां आहार’ नाम से राज्य के 500 स्थानों पर संचालित होगी।

राज्य सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य बंगाल के ऐतिहासिक महत्व को सम्मान देना और आम लोगों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं का दायरा बढ़ाना है।---------------

   

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