राजस्व परिषद की नई पहल : न्यायालयों में प्रमाणित स्कैन प्रति से होगी कार्यवाही, मूल अभिलेख रहेंगे सुरक्षित’

लखनऊ, 04 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद ने ’राजस्व परिषद के न्यायालयों’ में अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण, न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष एवं पारदर्शी बनाने तथा प्रकरणों के त्वरित निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब राजस्व परिषद के न्यायालयों द्वारा किसी वाद में अभिलेख तलब किए जाने पर सामान्यतः मूल अभिलेखों के स्थान पर संबंधित अधीनस्थ न्यायालय द्वारा उपलब्ध कराई गई ’प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रति (Certified Complete Scanned Copy)’ के आधार पर ही न्यायिक कार्यवाही की जाएगी।

’राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के निर्देशों के क्रम में यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।’ इस पहल का उद्देश्य मूल अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के साथ-साथ न्यायिक कार्यवाही को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाना है। इससे मूल अभिलेखों के बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजे जाने की आवश्यकता कम होगी, जिससे उनके क्षतिग्रस्त होने अथवा विलंब से उपलब्ध होने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा प्रेषित की जाने वाली वाद पत्रावली की स्कैन प्रति में प्रत्येक पृष्ठ, परिशिष्ट, मानचित्र, नोटशीट, आदेश पत्रक एवं अन्य समस्त संलग्न अभिलेख क्रमवार एवं स्पष्ट रूप से सम्मिलित किए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक स्कैन प्रति के साथ संबंधित ’राजस्व रिकॉर्ड कीपर (आरआरके)’ द्वारा विधिवत प्रमाणित प्रमाण-पत्र संलग्न करना भी अनिवार्य होगा।

राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विशेष वाद में ’राजस्व परिषद का न्यायालय’ कारण अभिलिखित करते हुए मूल अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश देता है, तभी मूल अभिलेख उपलब्ध कराए जाएंगे। अन्य सभी मामलों में प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रति के आधार पर ही कार्यवाही की जाएगी।

व्यवस्था की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी स्तर पर अपूर्ण, अस्पष्ट अथवा अप्रमाणित स्कैन प्रति प्रेषित की जाती है, तो संबंधित ’राजस्व रिकॉर्ड कीपर (आरआरके)’ को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी मानते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

विभाग ने समस्त मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस नई व्यवस्था से तत्काल अवगत कराते हुए इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही राजस्व परिषद के न्यायालयों द्वारा तलब की गई पत्रावलियों की प्रमाणित स्कैन प्रतियां निर्धारित समयावधि में उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह पहल ’राजस्व परिषद के न्यायालयों’ में डिजिटल अभिलेख प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करने, मूल अभिलेखों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने तथा न्यायिक कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में इस पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन संचालित किए जाने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे न्यायिक कार्यवाही और अधिक सुगम, पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकेगी।

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