तेजस्वी यादव ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा
- DSS Admin
- May 23, 2026
पटना, 23 मई (हि.स.)। बिहार सहित पूरे देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही हैं और सरकार इस पर गंभीर नहीं है।
शनिवार को पटना में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। पिछले 10 दिनों में तेल की कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जो औसतन लगभग 50 पैसे प्रतिदिन के बराबर है। उनके अनुसार यह वृद्धि रुकने के बजाय आगे भी जारी रह सकती है, जिससे जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां जनविरोधी और पूंजीपरस्त सोच से प्रेरित हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम थीं, तब भी उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिला। वहीं अब जब कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, तब भी इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 की तुलना में कच्चे तेल की कीमतें कई बार कम होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं।
राजद नेता ने आगे कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जिससे खाद्य वस्तुओं से लेकर परिवहन तक सभी क्षेत्रों में लागत बढ़ेगी। इसके चलते निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर घट सकते हैं, छोटे उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है और प्रवासी श्रमिकों के पलायन की स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है। इससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो जाएगी।
तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अन्य राजनीतिक और वैचारिक विषयों पर अधिक सक्रिय दिखती है। उनके अनुसार, जनता की मूल समस्याओं जैसे महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान संवैधानिक संस्थाओं के उपयोग, प्रचार-प्रसार और सामाजिक विभाजन से जुड़े मुद्दों की ओर अधिक रहता है, जबकि आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह की नीतियों का खामियाजा अंततः आम जनता को भुगतना पड़ता है।
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