जहानपोरा में पुरातात्विक खुदाई के दूसरे चरण की शुरुआत
- Rahul Sharma
- Aug 30, 2026
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने शनिवार को बारामूला के जहानपोरा में चल रही पुरातात्विक खुदाई के स्थल का दौरा कर कार्यों की प्रगति और स्थल के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का जायजा लिया। इस दौरान खुदाई के दूसरे चरण की शुरुआत भी की गई।
दौरे के दौरान कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव, बारामूला के उपायुक्त, अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक, एसएसपी बारामूला, एसडीएम उड़ी तथा कश्मीर विश्वविद्यालय और गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बारामूला के शिक्षक एवं अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
जहानपोरा बारामूला क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल माना जाता है, जहां से पूर्वकाल में यहां रहने वाले समुदायों की बसावट, जीवनशैली, तकनीक और भौतिक संस्कृति से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना है। पहले चरण की खुदाई में प्राकृतिक पत्थरों और कंकड़ों से बनी एक दीवार, कई लोहे की कीलें तथा मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले थे। इनमें से मानव कंकाल की बरामदगी को महत्वपूर्ण खोज माना गया है। वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए इससे तत्कालीन लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य और दफनाने की प्रथाओं से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पहले चरण में मिले अवशेषों के आधार पर अब दूसरे चरण की खुदाई शुरू की गई है। इसमें पुरातात्विक परतों की व्यवस्थित जांच, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और प्राप्त अवशेषों का विश्लेषण किया जाएगा। इससे स्थल के कालक्रम, वास्तुकला, भौतिक संस्कृति और मानव बसावट की प्रकृति एवं विस्तार को समझने में मदद मिलने की संभावना है।
मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि पुरातात्विक शोध कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को क्षेत्र आधारित शोध को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पुरातात्विक कार्यों का व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने के लिए शोध, संरक्षण और जागरूकता गतिविधियों को जारी रखने की आवश्यकता बताई।
सेंटर फॉर आर्कियोलॉजिकल स्टडीज (सीएएस) के निदेशक ने स्थल की व्यवस्थित और वैज्ञानिक खुदाई, प्राप्त अवशेषों के उचित दस्तावेजीकरण तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। एसपीएस संग्रहालय के निदेशक ने भी पुरातात्विक सामग्री के वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण और संरक्षण को आवश्यक बताया। जिला प्रशासन ने खुदाई कार्य को सुचारु रूप से जारी रखने तथा पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के लिए आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया।

