परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाना गैर-जिम्मेदाराना, संवैधानिक प्रक्रिया का करें सम्मान: भाजपा

रांची, 27 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने परिसीमन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन कोई राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि संविधान में निहित एक आवश्यक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।

शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में शर्मा ने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाना चाहिए, ताकि जनसंख्या में हुए बदलाव के अनुसार लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व संतुलित बना रहे। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि की दर अलग-अलग रही है, जिसके कारण कई संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में असमानता पैदा हो गई है। ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़ी इस प्रक्रिया को पहले ही दो बार 25-25 वर्षों के लिए स्थगित किया जा चुका है। ऐसे में अब संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि प्रत्येक नागरिक के मत का मूल्य अधिक समान हो और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व अधिक न्यायसंगत बन सके।

मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि अभी देश में जनगणना की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और न ही उसके आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल और संगठन काल्पनिक आशंकाएं पैदा कर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना गैर-जिम्मेदाराना है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि परिसीमन किसी राज्य, क्षेत्र या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे देश में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और न्यायसंगत बनाने की संवैधानिक व्यवस्था है। इस विषय पर अनावश्यक भय और भ्रम फैलाना स्वस्थ लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि संवैधानिक संस्थाओं और संविधान सम्मत प्रक्रियाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। परिसीमन पर सार्थक चर्चा जनगणना के आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि अफवाहों, आशंकाओं या राजनीतिक स्वार्थ के आधार पर। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भ्रामक प्रचार से सावधान रहें और संविधान की भावना के अनुरूप लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर विश्वास बनाए रखें।-----------

   

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