पिंक लेडी आशा शर्मा ने 350 छात्राओं को बांटे रियूजेबल सेनेटरी पैड
- DSS Admin
- Jul 04, 2026

स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में छात्राओं को दी जानकारी
धमतरी, 04 जुलाई (हि.स.)। माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त झिझक तोड़ने, महिलाओं को कैंसर के प्रति जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर उत्तराखंड की पिंक लेडी आशा शर्मा शनिवार को अपने पुराने स्कूल पहुंचीं। आशा फाउंडेशन की ओर से शिव सिंह वर्मा आदर्श शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धमतरी में आयोजित बालिका स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में उन्होंने 350 छात्राओं को निशुल्क रियूजेबल सेनेटरी पैड वितरित किए।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि माहवारी कोई शर्म का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का विषय है। सर्वाइकल व स्तन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से समय पर जांच एवं जागरूकता के जरिए बचाव संभव है।
आशा फाउंडेशन की संस्थापक एवं विद्यालय की पूर्व छात्रा आशा शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1987 से 1991 तक इसी विद्यालय में अध्ययन किया और वर्ष 1991 में 12 वीं की परीक्षा यहीं से उत्तीर्ण की। वर्तमान में वे उत्तराखंड के नैनीताल में निवास करती हैं, वहीं उनका मायका चारामा विकासखंड के ग्राम लखनपुरी है। उनके पति अनिल शर्मा देश के प्रतिष्ठित स्कूल बिरला विद्या मंदिर नैनीताल के प्राचार्य हैं। वर्ष 2020 में उन्होंने आशा फाउंडेशन की स्थापना कर महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर पिंक मुहिम की शुरुआत की। महिलाओं के स्वास्थ्य और माहवारी स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के कारण उन्हें उत्तराखंड में पिंक लेडी के नाम से जाना जाता है।
कार्यक्रम में उन्होंने सर्वाइकल एवं स्तन कैंसर की समय पर जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि थोड़ी-सी जागरूकता से इस बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाया जा सकता है। उन्होंने माहवारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने, इस विषय पर खुलकर चर्चा करने और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने 350 छात्राओं को कपड़े से बने पर्यावरण अनुकूल एवं लीक-फ्री रियूजेबल सेनेटरी पैड वितरित किए।आशा शर्मा ने बताया कि स्तन कैंसर केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि जागरूकता की कमी के कारण पुरुष अक्सर इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।
उन्होंने महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों से भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की। आशा शर्मा ने बताया कि इस पैड का उपयोग दो से ढाई वर्ष तक किया जा सकता है। बाद में इन्हें सुरक्षित रूप से नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड के सुरक्षित निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस विद्यालय से उन्हें शिक्षा, संस्कार और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली, उसी विद्यालय में लौटकर छात्राओं के लिए काम करना उनका सपना था। उन्होंने समाज से माहवारी स्वच्छता, सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के प्रति जागरूक होने की अपील करते हुए कहा कि समय पर जांच और सही जानकारी से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जंग जीती जा सकती है।

