समय रहते नहीं चेते तो नलों से पानी नहीं पश्चाताप बहेगा : कुलपति

प्रयागराज, 22 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने शुक्रवार को विश्व जल दिवस पर नासी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत के 70 प्रतिशत इलाके में पीने लायक पानी की कमी हो गई है। यदि हम समय रहते नहीं चेते तो हमारे नलों से पानी नहीं सिर्फ पश्चाताप बहेगा।

मुख्य अतिथि कुलपति ने कहा कि उस समय हमें याद आयेगा कि हमने कभी एक गिलास पूरा पानी पिया था। पानी की कमी से मानव शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सारे एनसीआर क्षेत्र में पानी की कमी होने के कारण टैंकरों से पानी सप्लाई होती है। क्या हम तैयार हैं चेन्नई एनसीआर जैसी परिस्थिति सारे देश में देखने के लिए।

उन्होंने आगे कहा कि जैसे लंदन में थेम्स नदी गंदी होने पर वहां के लोगों ने मुहिम चलाई और आज वो नदी साफ है, वैसे ही हमें भी कुछ करना होगा। पृथ्वी पर जीवन का संकट पैदा हो जायेगा, यदि हम पीने के पानी के स्त्रोतों के संरक्षण नहीं करते। न सिर्फ एनसीआर चेन्नई और बैंगलोर में पानी की कमी हो रही है और पलायन की स्थिति पैदा होना जारी है वरन मैक्सिको, केपटाउन, पर्थ, सैन फ्रांसिसको पानी की कमी से जूझ रहे हैं। इसका समाधान कुछ तकनीकि रूप से आगे के देशों में रिसाइकल्ड पानी का इस्तेमाल खेती और सफाई आदि में बहुत सालों से किया जाता है।

प्रयागराज जैसे छोटे शहरों में स्थिति अभी बहुत खराब नहीं है। किन्तु यदि हमने जल संरक्षण पर वृहद स्तर पर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति बिगड़ भी सकती है। नदी का पानी साफ रखने पर चोलेरा, कैंसर, डायरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। पीने का पानी आज हम सोने से ज्यादा बहुमूल्य चीज को खरीदने पर सोचते भी नही हैं जबकि कुछ वर्ष पहले तक पानी खरीदने के बारे सोचना भी असम्भव था। इन सभी के लिए जनमानस में इसके महत्व के बारे में बताना चाहिए और जागरूकता फैलानी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/मोहित

   

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