ठाणे में मैंग्रोव का बचाता कंदलवन विभाग का लोह कवच

मुंबई,04 जून ( हि.स.) । ठाणे ईस्ट का मीठाबुंदर रोड इलाका, जो सुबह की धुंध में झांकते सदा बहार (मैंग्रोव )और खाड़ी में घूमते पक्षियों से भरा रहता है, अब ज़्यादा सुरक्षित हो गया है। इस एनवायरनमेंट पर्यावरण के लिए संवेदनशील इलाके में मैंग्रोव को बचाने के लिए, कंदलवन विभाग ने लोहे का सुरक्षा जाल लगाकर बिना इजाज़त के भराव पर असरदार तरीके से रोक लगा दी है। इससे खाड़ी के किनारे की जैविक विविधता (बायोडायवर्सिटी )को सुरक्षा कवच मिला है और इलाके में नई जान आ गई थी है।

ठाणे ईस्ट में स्वामी समर्थ मठ रोड के किनारे कुछ जगहों पर, मिट्टी, बजरी और कचरा डालकर खाड़ी के किनारे को भरना शुरू कर दिया गया था। इससे यह डर जताया गया था कि इससे मैंग्रोव, पानी का नैचुरल बहाव और जंगली जानवरों के रहने की जगह पर असर पड़ेगा। खास तौर पर, यह इलाका सुनहरी लोमड़ी, नेवले, घोरपड़, कई तरह के सांपों और कई तरह के पक्षियों के रहने की जगह के लिए जाना जाता है।

इसी को देखते हुए, मैंग्रोव फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने तुरंत कदम उठाए हैं और सड़क के दोनों तरफ एक सुरक्षा जाल लगा दिया है। इससे क्रीक एरिया में पानी भरना बंद हो गया है और मैंग्रोव को सुरक्षा कवच मिल गया है।

मीठाबंदर एरिया में मैंग्रोव सिर्फ पेड़ों का एक समूह नहीं हैं, बल्कि ठाणे क्रीक की पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) सेहत के खंबे हैं। वे कई ज़रूरी रोल निभाते हैं जैसे कोस्टल इरोजन को रोकना, कार्बन सोखना, पानी में रहने वाले जीवों के लिए रहने की जगह देना और बाढ़ का असर कम करना।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर मैंग्रोव फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का यह कदम पर्यावरण बचाने के मामले में एक मिसाल माना जा रहा है।

ठाणे के वन अधिकारी मनीष पवार का कहना है कि - कंदलवन डिपार्टमेंट मीठाबंदर एरिया में मैंग्रोव को बचाने की लगातार कोशिश कर रहा है। इस एरिया में पहले लगाए गए मैंग्रोव अब तेज़ी से बढ़ रहे हैं और लोकल बायोडायवर्सिटी को फायदा पहुंचा रहे हैं। मैंग्रोव को कोई खतरा न हो, यह पक्का करने के लिए सुरक्षा के उपाय किए गए हैं और इस इकोसिस्टम की सुरक्षा और बचाव भविष्य में भी प्राथमिकता होगी।

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